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Short Moral Stories In Hindi | गरीब का लड़का

 

यह कहानी सच्ची घटना पर आधारित है एक गाँव में सूरज नाम का एक लड़का रहता है वो काम के वजह से शहर में जाता है

वहाँ उसे एक सरकारी कंपनी में अफसर के रैंक पे जॉब मिलता है यहाँ उसको दो महीने के लिए ट्रेनिंग दिया जाता है ट्रेनिंग

के समय उसके साथ काम करने वाले अफसर उसके साथ अच्छा बर्ताव नहीं करते है, काम पे ले जाने वाली गाड़ी में उसे नहीं

बैठाया जाता था।

 

Short Moral Stories In Hindi | गरीब का लड़का
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कभी कभी गाड़ी में ले जाते भी थे तो गाड़ी में आगे की सीट खाली होने के बावजूद उसे गाड़ी के पीछे वाली सीट में बैठाते थे

और तो और उससे सारे दूर दूर रहते थे ऐसा इस लिए क्युकी वह एक छोटी जाति का था  इसी कारण से उसके साथ भेद भाव

किया जाता था एक दिन सूरज ऑफिस के कैंटीन में अकेले बैठ कर रो रहा होता है,

 

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उसी समय एक नेक दिल वाला वेक्ति प्रमोद जो उसके साथ ऑफिस में काम करता है वहाँ आता है और सूरज से उदासी का

कारण पूछता हैं, सूरज अपनी सारी आप बीती प्रमोद को बताता है की वो एक गरीब परिवार से हैं उसके पिताजी गाँव में एक

पथर पे बैठ कर सलून का काम करते हैं।

 

मेरी तीन बहने हैं मैं गरीबी से निकलने के लिए बहुत मन लगा के पढ़ा था अठमी कक्षा के बाद मुझे बारवी कक्षा तक अपने गाँव

से 14 km पैदल सरकारी स्कूल आना जाना पड़ता था बारवी कक्षा में अच्छे नंबर से पास होने के बाद मेरे पिताजी ने कहा

गरीबी के कारण मैं तुम्हे आगे नहीं पढ़ा सकता,

 

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परन्तु पढ़ाई में लगन देखने के कारण मेरे जीजा जी ने मुझे अपने साथ शहर में ले आये थे और अपने साथ फल बेचने के काम

में लगवाया था वहां मैं 4 साल तक पढ़ाई के साथ  साथ फल बेच कर अपनी पढ़ाई की फीस और अपना खर्चा निकालता रहा।

 

परीक्षा टेस्ट पास करने के बाद मुझे ये सरकारी नौकरी मिली वो भी ये लोग शान्ति से करने नहीं देते ये सारी बात सुनने के बाद

प्रमोद जी उसे ऑफिस से घर और घर से ऑफिस खुद गाड़ी से छोड़ा करते थे,

 

प्रमोद के ऐसा करने के कारण वही लोग प्रमोद जी का विरोध करने लगते हैं और उसे जाति प्रथा की बात समझाने लगते हैं

परन्तु प्रमोद उन्ही लोगो को उल्टा समझाता हैं की धर्म, जाति ये सब इंसान ने बनाया है भगवान ने तो इंसान को बनाया है

ताकि वो आपस में मिल- जूल कर रह सके।

 

ये बात सुन के उन लोगो को अपनी गलती का ऐहसास हो जाता है और वे लोग सूरज के पास जा कर माफी भी माँगते है और

उस दिन के बाद से सूरज को कभी तंग नहीं किया जाता है वही सूरज जो नौकरी छोड़ के वापस गाँव जाने वाला था आज

प्रमोद जी के वजह से आज बहुत बड़ा अफसर बन गया है।

 

मोरल ऑफ़ दी स्टोरी:— दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमे धर्म या जाति प्रथा को त्याग कर हर एक इंसान

की मदद और उसके प्रति अच्छा व्यवहार करना चाहिए ईश्वर ने धर्म या जाति प्रथा नहीं बनाया है ये तो इंसान ने खुद बनाया है।

 

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