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Hindi Moral Stories For Kids | दो भाई और अमरुद पेड़

ये कहानी बहुत ही पुराने दिनों की है सुंदरबन नाम के एक  गाँव के पास एक बहुत ही घना जंगल था उस जंगल मे एक बहुत

बड़ा अमरुद का पेड़ था उस पेड़ के पास दो भाई वासु और रामु खेला करते थे। दोनों भाई उस पेड़ मे चढ़ कर अमरुद तोड़ा

करते और आराम से पेड़ के नीचे बैठ कर खाया करते थे और वही पे आराम भी किया करते थे वे रोज इसी तरह पेड़ के साथ

खेला करते थे और पेड़ को भी उनके आने से बहुत ख़ुशी होती थी,

दो भाई और अमरुद पेड़ | Hindi Moral Stories For Kids
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परन्तु  धीरे – धीरे दोनों भाई उस पेड़ के पास जाना कम कर दिए और फिर एक दिन बहुत दिनों बाद दोनों भाई उस पेड़ के

पास से गुजर रहे थे तो उन्हें देख पेड़ ने कहा आओ बच्चो मेरे साथ खेलो यह सुन कर बड़े भाई वासु ने कहा अब हम बच्चे नहीं

रहे जो पेड़ो के साथ खेले हम दोनों भाई बड़े हो गए है।

Short Moral Stories In Hindi

अब हमे खिलौनों के साथ खेलना अच्छा लगता है हमे नये – नये खिलौने चाहिए परन्तु हमारे पास पैसे नहीं है, यह सुन कर

अमरूद के पेड़ ने कहा बच्चो मेरे पास पैसे तो नहीं है परन्तु आप मेरे फल को तोड़ कर बाजार मे बेच के पैसे कमा सकते हो।

दोनों भाइयो ने उस पेड़ से अमरुद तोड़े और वहां से चले गए , बहुत दिनों तक दोनों भाई वासु और खेमू उस पेड़ के पास

नहीं आये यह देख बेचारा अमरूद का पेड़ बहुत दुखी हो गया।

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दोनों भाइयो का इंतज़ार करते करते कुछ साल बीत गए अब दोनों भाई बड़े हो गए फिर एक दिन दोनों भाई वासु और खेमू

उस जंगल मे वही अमरुद के पेड़ के पास गए, दोनों भाइयो को देख कर अमरुद का पेड़ खुश हुआ और बोला बच्चो मेरे साथ

खेलो, वासु ने कहा हम अब बड़े हो गए है,

हमारे पास अब खेलने के लिए समय नहीं है हमे अपने परिवार के लिए अच्छा सा घर बनाना है सो बहुत सारे पैसे की जरूरत है

क्या तुम हमारी मदद कर सकते हो पेड़ ने कहा मेरे पास तो पैसे नहीं है न तुम्हे देने के लिए घर हां तुम एक काम करो मेरी

शाखाये काट कर ले जाओ और अपने लिए घर बना लो ये सुन कर दोनों भाई शाखाये काट कर ख़ुशी ख़ुशी वहां से  चले गए।

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शाखाये कटने के बावजूद अमरुद का पेड़ खुश था परन्तु फिर दोनों भाई उसके बाद लौट के नहीं आये ये देख पेड़ बेचारा बहुत

दुखी हुआ, कुछ सालों बाद गर्मियों के दिनों मे दोनों भाई फिर उस पेड़ के पास गए उन्हें देख पेड़ बहुत खुश हुआ और उन्हें

खेलने को कहा, परन्तु वासु ने कहा अब हम दोनों भाई बूढ़े हो गए है सो हमें अपने घर के पास पुल बनाना है क्या तुम हमारी

मदद कर सकते हो पेड़ ने कहा मेरा तना काट लो और उसका पुल बना लेना उसके बाद दोनों भाइयो ने मिल कर उस पेड़ का

तना भी काट लिया।

फिर बहुत सालों तक दोनों भाई वापस नहीं आये फिर एक दिन दोनों भाई वापस आये उन्हें देख कर पेड़ ने कहा मुझे माफ

करना बच्चो पर तुम्हे देने के लिए मेरे पास कुछ भी नहीं बचा है सिर्फ जड़े ही बची है, दोनों भाइयो ने कहा जरूरते पूरी

करते – करते अब हम थक चुके है हमे अब कुछ नहीं चाहिए सिर्फ आराम की जरूरत है ये सुन कर पेड़ ने कहा आराम के

लिए पेड़ की जड़े सबसे अच्छी जगह है आ जाओ बच्चो आराम कर लो और फिर खुशी से पेड़ रोने लगा।

 “कड़ी धुप है जलते पाँव होते वृक्ष तो मिलते छाँव”

मोरल ऑफ़ दी स्टोरी:— दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमे अपने फयदे के लिए बेहरमी से पेड़ो को

काटना नहीं चाहिए उनकी देखभाल करनी चाहिए क्युकि पेड़ हमे फल, फूल, छाँव  और ऑक्सीजन

देते है, हमे हमेशा नये से नये पेड़ लगाने चाहिए।

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