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Panchatantra Moral Stories | परिश्रम का फल मीठा होता है

 

 Panchatantra Moral Stories | परिश्रम का फल मीठा होता है
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 Panchatantra Moral Stories परिश्रम का फल मीठा होता है, एक समय की बात है रामपुर नाम के एक गाँव में रमेश

और राजेश दो बहुत अच्छे मित्र रहा करते थे। गाँव के लोग उनकी दोस्ती देख कर बहुत खुश हुआ करते थे, रमेश बहुत ही

आस्तिक था और राजेश बहुत ही परिश्रमी था।

 

 Moral Stories, उन दोनों ने मिलकर रामपुर गाँव मे एक एकड़ जमीन खरीद ली, उन दोनों का उदेस्य था खेती करके

आमिर होना, राजेश बहुत परिश्रम करने लगा जैसे की मिट्टी खोदना, बीज डालना और दूसरी तरफ रमेश सिर्फ अपने लिए

भगवान से आशीर्वाद मांगता रहा उसका यह सोचना था की इंसान जो कुछ भी करता है वो सब ऊपर वाले की इक्छा से होता

है, परिश्रम का फल मीठा होता है

 

https://darkside-devils.com/2020/06/hindi-moral-story-दो-दोस्त.html

 

धीरे धीरे दिन बीतने लगा और एक दिन ऐसा आया की खेतो मे चारो तरफ हरयाली छा गयी, ये देख राजेश रमेश को कहता

है भाई देखा कितनी अच्छी फसल हुई है रमेश उत्तर देता है ये सब ऊपर वाले का आशीर्वाद है मैं इसलिए तो रोज ऊपर वाले

को याद करता हु।

 

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राजेश रोज मन लगा कर खेती करने लगा और कुछ दिन बाद जमीन सुन्हेरी फसल से भर गयी यह देख दोनों मित्र बहुत खुश

हुए, रमेश  हाथ जोड़ कर ऊपर वाले को धन्यवाद करने लगा और कहने लगा ये सब आपके आशीर्वाद से संभव हुआ है, ये

सब आपके आशीर्वाद का फल है।

 

अच्छे फसल के कारण दोनों को बहुत लाभ हुआ पर फिर समस्या आयी पैसो के बटवारे को ले कर दोनों मित्रो मे अधिक लाभ

के हिसे को लेकर धीरे धीरे बहस शुरू होने लगी राजेश कहता खेत मे खुदाई से लेकर बीज डालने से ले कर पानी देने तक

सारा काम मैंने किया है,

 

Panchatantra Stories, परन्तु दूसरी  तरफ रमेश कहता है मैंने ऊपर वाले से आशीर्वाद माँगा था जिसका फल स्वरूप ये

अच्छा फसल मिला है इसलिए लाभ का अधिक हिस्सा मुझे मिलना चाहिए।

 

पहली बार पैसो को लेकर उन दोनों मे झगड़ा होने लगा, दोनों मित्र इसका सही फैसला जानने के लिए गाँव के मुखिया के पास

गए मुखिया जी ने सारी बात सुनकर दोनों को एक काम दिया और कहा तुम दोनों मे से जो इस कठिन कार्य को कर सकेगा

उसी को लाभ का अधिक हिस्सा मिलेगा।

 

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फिर मुखिया जी ने दोनों को दो बोरियां दे कर कहा इन बोरियों मे कंकड़ मिलाया हुआ दाल है कल सुबहे तक तुम दोनों मित्रो

को दाल और कंकड़ अलग अलग करके लाना होगा  मैं तुम दोनों का कार्य देख कर अपना निर्णय दूंगा,

 

परिश्रम का फल मीठा होता है, रमेश और राजेश दोनों  बोरियां उठाकर चल आते है रमेश बोरी उठा कर मंदिर मे रख देता

है और कहता है, हे ऊपर वाले आपका आशीर्वाद रहा तो सब संभव हो सकता है ये कह कर रमेश ऊपर वाले के लिए बोरी

रख कर अपने आराम से घर पर सो जाता है और दूसरी तरफ राजेश रात को दिया जला कर दाल और कंकड़ अलग करने

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जैसे सुबहे हुई राजेश बोरी के दाल और कंकड़ जितना हो सका अलग अलग करके मुखिया जी के पास ले आया उधर रमेश

ऊपर वाले पे भरोसा करके मंदिर से बोरी उठा कर मुखिया जी के पास ले आया, मुखिया जी ने रमेश से पूछा क्या तुम पूरी

बोरी के दाल चुन कर लाये हो रमेश ने कहा नहीं मुखिया जी मैंने सारा काम ऊपर वाले के हाथ छोड़ दिया था।

 

परन्तु उनका आशीर्वाद मुझे जरूर प्राप्त हुआ होगा यह सुन कर मुखिया जी कहा इसका मतलब तुमने अपने दोनों हाथो का

इस्तमाल न करके ऊपर वाले के हाथो पे निर्भर रहे, बोरी को खोलो और मुझे दिखाओ रमेश ने बोरी खोला उसमे जैसे कंकड़

भरे हुए थे ठीक वैसे ही अभी भी है।

 

फिर मुखिया जी ने हस्ते हुए कहा ऊपर वाले ने सब को दो हाथ दिए है परिश्रम करने के लिए यही उनका श्रेस्ट दान है  इसलिए

राजेश के परिश्रम से फसल अच्छी हुई थी इसलिए धन का अधिक लाभ राजेश को मिलेगा।

 

मोरल ऑफ़ दी स्टोरी:— Panchatantra Moral Stories, दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमे हमेशा

परिश्रम करना चाहिए क्योकि ऊपर वाला भी उसी को आशीर्वाद देते है जो परिश्रम करते है इसलिए

परिश्रम का फल मीठा होता है

 

 

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