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Moral Story | लालची बुढ़िया

Moral Story | लालची बुढ़िया

 
 
Moral Story | लालची बुढ़िया, Panchatantra Stories
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Hindi Moral Kahani,

 
एक समय की बात है सुंदरनगर नाम के एक गाँव में एक लालची बुजुर्ग महिला मीना देवी रहती थी। उसके दो 
 
बेटे थे सारे परिवार एक ही घर में रहते थे, मीना देवी को नये कपड़े पहनने का और आईने में अपने आप को
 
देखने का बहुत पसंद था।
 
 
जब उसके बेटे खेती करने निकल जाते तो उसकी बहुएँ अपने काम में वयस्त हो जाती परन्तु मीना देवी को 
 
इस बात से कोई परवह नहीं थी वह अपनी बहुएँ की थोड़ी-सी मदद भी नहीं करती थी बुढ़िया बहुत आलसी थी 
 
बगल में रखा हुआ पानी से भरा हुआ गिलास भी उठा नहीं सकती थी,

वो हर बार किसी न किसी को बुलाती और परेशान करती थी, उसकी बहुएँ उसका कहना तो मानती थी पर 

उससे परेशान भी रहती थी लालची बुढ़िया को खाने का बहुत शौक़ था जब कभी भी स्वादिस्ट भोजन बनता था 

वह खुद रसोई घर में चुप चाप जा के कटोरी में भर कर अपने कमरे में ले जाती थी।


भोजन के समय बहुएँ सबको खाना परोसती थी मगर जब उनके भोजन का समय आता खाना कम पड़ जाता 

था, उन्हें पता ही नहीं चल पता था कि खाना कम कैसे पड़ जाता है कभी-कभी तो उनके पति भी उनसे लड़ते 

थे की खाना कम मात्रा में क्यों बनाया है ये देख मीना देवी मन ही मन बहुत प्रसन्न होती थी।


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एक दिन मीना देवी का बड़ा लड़का बाज़ार से मिठाई ले के आया और अपने बच्चो के लिए रख दी ये देख 

मीना देवी से रुका ही नहीं गया वह अपने पोते पोतियो के पास आयी और उनसे मिठाई का डबा देखने के

बहाने ले लिया और चुप चाप कुछ मिठाई अपने पास छिपाली और कमरे में ले जा के खाने लगी वह हमेशा 

ऐसा ही करती थी मीना देवी अपने बहुएँ के कपड़े भी चुरा लेती थी,


मीना देवी ऐसे ही अपने परिवार में सबको तंग करती थी एक दिन अपने बेटे की सास रूपवती को घर आते 

देख उसे बहुत जलन हुई छोटे बेटे की सास बच्चो के लिए खिलोने और बेटियों के लिए साड़ियाँ और मीना देवी

के लिया बक्सा लायी थी जिसे पा कर लालची बुढ़िया मीना देवी बहुत खुश हुई।

रूपवती के घर आने पर स्वादिस्ट भोजन बनता देख मीना देवी को उससे जलन होने लगी और अपनी बहुएँ को

रसोई घर से बाहर आने का इंतज़ार करने लगी जैसे ही वह दोनों रसोई से बाहर आयी, चुप चाप मीना देवी 

रसोई घर में गयी और भोजन में बहुत सारी लाल मिर्च डाल दि, उसने इर्षा के करण ये भी नहीं सोचा कि ये 

खाना उसके पोते पोतियो ने भी खाना है जैसे ही सब लोगों ने खाना शुरू किया पर लाल मिर्च के कारण सब से 

खाया ही नहीं गया।


सब लोग पानी के लिए तड़पने लगे रूपवती की हालत देख वह मन ही मन खुश होने लगी फिर उसने यह 

सोचा कि सब को शक हो जायेगा इसलिए लालची बुढ़िया नाटक करने लगी और पानी के लिए तरसने लगी

परन्तु रूपवती को शक हुआ रूपवती ने मीना देवी पर नजर रखनी शुरू कर दी,

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कुछ दिन बाद रूपवती ने ये देखा कि मीना देवी बच्चो से मिठाइएँ चुराती है, बहुएँ की साड़ियाँ चुरा कर उस 

बक्से में रखती है, उसने ये भी देखा कि मीना देवी रसोई में चुप चाप जा कर कटोरी में स्वादिस्ट पकवान भर 

के कमरे में ले जाती है।


फिर एक दिन सब लोग घर पर थे रूपवती ने सोचा आज सही वक्त है सबको बताना चाहिए उसने मीना देवी 

का बक्सा जो उसने दिया था उसे खोला तो सब लोग उसके अंदर देख कर हैरान रेह गए उसके अंदर तरह-

तरह की मिठाइएँ, बहुएँ की साड़ियाँ और पैसे थे।

रूपवती ने मीना देवी को बहुत समझाया कि जो तुम कर रही हो वह बहुत ग़लत कार्य है तुम अपने परिवार के

लोगों को परेशान कर रही हो वह तुम्हे कितना प्यार करते है ये सब सुन कर लालची बुढ़िया मीना देवी की आँखे

खुल गयी और उसे अपनी गलती का एहसास हो गया, उस दिन से मीना देवी अपने बच्चो का अच्छे से ख्याल 

रखती थी वह अपनी बहुएँ का भी खूब ख्याल रखती थी वह अपनी बहुएँ के काम में मदद भी करती थी।


मोरल ऑफ़ दी स्टोरी:—दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमें अपने पास मौजूद ज़िन्दगी से 

संतुष्ट रहना चाहिए, लालच नहीं करनी चाहिए और उम्र के साथ–साथ हमे अपना व्यवहार भी बदलना चाहिए।

 

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