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Hindi Moral Story | दो दोस्त

Hindi Moral Story | दो दोस्त, moral stories in hindi for class 7

 Hindi Moral Story | दो दोस्त


Hindi Moral Story | दो दोस्त, moral stories in hindi for class 7
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एक राज्य में रूद्र राज नाम का एक राजा था वह बहुत कठोर और बेरहम दिल इंसान था राज्य में किसी की 

बात नहीं सुनता था कोई भी व्यक्ति उसके खिलाफ आवाज उठाता उसे कठोर से कठोर दंड देता। उस 

राज्य में रमेश और दीपक नाम के दो जिग्री दोस्त रहते थे दोनों को एक दूसरे पर बहुत विश्वास था, राजा का 

अत्याचार देख कर वह चुप-चाप नहीं बैठ पाये।


एक दिन रमेश राजा के विरुद्ध बात करने लगा राजा के सैनिको ने ये सुना और तुरंत गिरफ्तार कर लिया और 

राजा के पास ले गए राजा के सामने भी रमेश विरुद्ध ही बात कर रहा था राजा को इस बात पर बहुत गुस्सा 

आया और अपने सैनिको को आज्ञा दी की वे रमेश को कारागार में बंद कर दे इस बात का पता दीपक को 

चलते ही दीपक मित्र को मिलने कारागार आता है,


मेरे दोस्त ये क्या हो गया मैं तुम्हारी मदद कैसे करु बताओ मुझे रमेश अपने दोस्त को देख कर बहुत खुश 

हुआ और बोला मेरे दोस्त मरने से पहले मैं अपनी माँ और बहन को देखना चाहता हु उनकी खुशहाल ज़िन्दगी 

के लिए सब प्रबंद करना चाहता हु बस मैं और कुछ नहीं चाहता हु ये सब सुन कर दीपक राजा के पास गया 

और अपने दोस्त की आखरी ख्वाहिश के बारे में बताया।


राजा जी आप मेरे दोस्त रमेश को कुछ दिनों के लिए जाने दो जब तक वह वापस नहीं आ जाता मैं उसकी 

जगह ले लूँगा,


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राजा ने बोला अगर तेरा दोस्त फांसी के समय तक नहीं आया तो फांसी की सजह तुम्ही को मिलेगी दीपक ने 

राजा कि बात मान ली ये बात सुन कर राजा आश्चर्यचकित हो गया।


रमेश को जाने देने से पहले राजा ने इन दोनों की दोस्ती की बारे में पूछ-ताछ की फिर राजी हुए और कहा 

रमेश अगर तुम एक महीने के अंदर वापस नहीं हुए तो तुम्हारी जगह दीपक को फांसी होगी ऐसा बोल कर 

राजा ने रमेश को जाने दिया,


एक महीना खत्म हो गया परन्तु रमेश अभी तक वापस नहीं आया उस दिन शाम को राजा कारागार में गया 

और दीपक से बोला ज़िन्दगी में कभी भी किसी पर इतना भरोसा मत करना अब देखो उसकी जगह तुम्हारी 

मौत होने वाली है। मुझे इस बात का बहुत दुख हो रहा है उसी समय रमेश किले के अंदर प्रवेश हुआ रमेश 

अपने दोस्त दीपक के गले मिला और बोला मैंने यहाँ जल्दी आने की बहुत कोशिश की लेकिन हो नहीं पाया,


खैर तुम्हारी कृपया से मैं अपनी माँ और बहन से मिल पाया और उनके खुशाल ज़िन्दगी के लिए बंदोबस्त कर 

पाया मैं तुम्हारा आभारी हु दोस्त ये देख राजा बोला मैंने आज तक ऐसी दोस्ती नहीं देखी जिसमे कोई अपनी 

जान को दाव में लगा सका मुझे तुम दोनों पर बहुत गर्व है कि मेरे राज्य में ऐसे लोग भी रहते है।


ऐसा बोल कर राजा दोनों रमेश और दीपक को छोड़ दिया, उस दिन के बाद से राजा बहुत प्यार से राज्य करने 

लगा।


मोरल ऑफ़ दी स्टोरी:—दोस्तों इस कहानी से हमे ये शिक्षा मिलती है कि हमे भी रमेश और दीपक 

की तरह अपने दोस्तों के साथ प्रेम, विश्वास और मुसीबत के समय एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।


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